EPISODE-22 टूटे पै फिर न जुरै 06/11/26
EPISODE 22
टूटे
पै फिर न जुरै 06/11/26
INTRO
MUSIC
नमस्कार
दोस्तों! मैं मीता गुप्ता, एक आवाज़, एक दोस्त, किस्से कहानियाँ सुनाने वाली आपकी मीत। जी हाँ, आप सुन रहे हैं मेरे पॉडकास्ट, ‘यूँ ही कोई मिल
गया’ के दूसरे सीज़न का अगला एपिसोड ...जिसमें हैं, नए
जज़्बात, नए किस्से, और वही
पुरानी यादें...उसी मखमली आवाज़ के साथ...। जी हाँ
दोस्तों, आज हम बात करेंगे शादी की, जो एक साझेदारी है, गठबंधन है, आज हम बात करेंगे कम्पैटिबिलिटी की, शादी को बचाने
की जद्दोजहद की और बात करेंगे टूटते रिश्तों की, बढ़ती दूरियों, अवसाद, निराशा, अकेलेपन और मानसिक तनाव की..
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बड़े
ही प्यार से नीरज ने शादी का निमंत्रण दिया, बड़ा ही अनुग्रह, आग्रह, मनुहार और अधिकार सा लगा, जब उसने कहा, आपको तो आना ही है, मेरे लिए समय नहीं निकालेंगी? खैर, यह उसका प्यार ही था कि मैं नीरज और दीक्षा की शादी में पहुँची। प्री
वेडिंग फ़ोटो सेशन से लेकर रोका, हल्दी, सगाई, बैचलर्स पार्टी, कॉकटेल, और न जाने क्या क्या? उसने मुझे सारी फोटो भेजी थीं। हर फोटो की में फ़िज़ाओं में रोमांस का खुमार
दिखा। कितने खुश होते हैं सब शादियों में। जिनकी शादी हो रही है, वे भी और जो शादियों में मेहमान बन कर आते हैं, वे सब भी। खूब आनंद का, जोश का, डांस फ़्लोर पर ठुमकों का, हँसी ठिठोली का, उल्लास का माहौल रहता है। वरमाला के समय तो मानो शांत सागर में हिल्लोरें
उठने लगती हैं। लगता है जीवन भर का सारा हास परिहास उसी समय संपन्न होगा। और फिर
सभी वर वधू को उनके वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएँ देकर अपने अपने सब घर चले जाते
हैं। जैसे हमारी हिंदी फिल्मों में भी अंत में THEY LIVED HAPPILY
EVER AFTER वाली बात होती है और सभी
किरदार आपस में मिल जाते हैं, सभी के विवाह हो जाते है
और फिल्म का ‘दी एंड’ हो जाता है। लेकिन क्या वास्तव में दी एंड हो जाता है?
लगभग
डेढ़ साल बाद नीरज का फ़ोन आया। हमेशा की तरह मैंने चहक कर पूछा,
और
कैसे हो नीरज?
दीक्षा
कैसी है?
बड़े
दिनों बाद याद आई मेरी?
नीरज
काफ़ी शांत था, उसकी आवाज़ में दर्द छलक रहा था, बोला, सोच रहा था, आपसे बात करूँ तो करूँ कैसे, हिम्मत ही नहीं हो रही थी, बात करने की।
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मैंने
पूछा,
क्यों?
क्या
हुआ?
सब
ठीक?
वह
तो मानो भरा बैठा था, फफक फफक कर रोने लगा,
बोला, हमारी
शादी नहीं चली, टूट गई।
इस
पर मेरी भी हिम्मत नहीं हुई कि पूछ सकूँ, कि क्या हुआ? कैसे हुआ?
इसीलिए
मैं अक्सर यह सोचती हूँ कि क्या विवाह का संपन्न हो जाना या फ़िल्म का ‘दी एंड’ हो
जाना ही खुशहाल जीवन की गारंटी है? यदि हाँ, तो फिर आए दिन विवाह टूट क्यों रहे हैं? क्यों
वकीलों और काउंसलरों के दरवाज़े खटखटाए जा रहे हैं? पहले
अपने लिए योग्य साथी की तलाश, फिर विवाह का खर्चा और
फिर विवाह को बचाने की जद्दोजहद। विवाह में होने वाले खर्चे से ज़्यादा महंगा है
विवाह को बचाना। टूटते रिश्ते, बढ़ती दूरियाँ, अवसाद, निराशा, अकेलापन
और मानसिक तनाव का पर्याय बनकर रह गए हैं विवाह। आखिर क्यों, दोस्तों?
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इन
दिनों देश विदेश में हज़ारों महिला और पुरुष अपने विवाह को बचाने या उससे छुटकारा
पाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। क्या
वे समझते हैं कि शादी एक साझेदारी है, एक गठबंधन है, एक कम्पैटिबिलिटी है जिसमें दोनों पक्ष शामिल
होने का फैसला करते हैं, जिसका मतलब है कि आप दोनों एक
रिश्ते में बंधे हैं, अपने कार्यों के लिए आप जवाबदेह
होने के साथ साथ प्रतिबद्ध भी हैं। जब चीज़ें खराब होती हैं, तो पति या पत्नी को आईने में दिखने वाले अपने अक्स के बजाय किसी और पर दोष
मढ़ना आसान लगता है। ज़िम्मेदारी लेना, ओनरशिप लेना, रिश्ते को बचाने का सबसे
अच्छा तरीका है। जी हाँ, आपको उस रिश्ते को ओन करना ही होगा| जिस क्षण आप किसी रिश्ते के लिए "हाँ" कहते हैं, उस क्षण से लेकर विवाह समाप्त होने तक, जो कुछ
भी होता है, उसके लिए आप ज़िम्मेदार होते हैं, चाहे वह अच्छा हो या बुरा। आपको खुद को कोसने की ज़रूरत नहीं है, आपको बस इतना करना है कि चीज़ों को सुधारने से पहले खुद से झूठ बोलना बंद
कर दें, अगर रिश्ते को बचाने की कोशिश करनी है तो.. , है न दोस्तों?
इसके
लिए कभी कभी चुप रह जाना भी ज़रूरी है। मेरी माँ अक्सर कहा करती हैं कि एक चुप सौ
को हरावे। है भी सच! विवाद के समय, झगड़े के समय आप जितना
ज़्यादा बात करेंगे, वह उतना ही आग में घी का काम
करेगा। घी के स्रोत को हटा दें, और आग बुझ जाएगी या कम
से कम उसकी लपट तो कुछ कम हो ही जाएगी। अब इससे क्या होगा? इससे आप दोनों को संभलने और अपने विवादों को दूर करने के तरीके पर
पुनर्विचार करने का समय मिलेगा। जब कोई जीवनसाथी क्रोधित या भयभीत होता है, तो उसका व्यवहार अनपेक्षित हो जाता है, ऐसे में
यदि दूसरा व्यक्ति चुप रह सकता है, उस जगह से हट सकता
है। जब आप सीन से ही गायब हो गए, तो विवाद कम हो सकता
है। क्या उसी समय सारा फ़ैसला करना ज़रूरी है? पर होता
क्या है? हमें तो अपना अहम शांत करना होता है न , अपने साथी को दंगल में हराना है न, फिर चाहे
रिश्ता टूटे तो टूटे! मानो शादी नहीं डब्ल्यू डब्ल्यू ई का कोई मैच हो..|
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जी
हाँ दोस्तों! अंधड़ के गुज़र जाने के बाद बातचीत सबसे बड़ा अस्त्र है, मसले
सुलझाने के लिए... आप अपने साथी के साथ बैठें, बात करें, चाय कॉफ़ी की चुस्की लें, थोड़ा घूमने चले जाएँ, दूर नहीं, तो मॉर्निंग/ईव्निंग वॉक कर लें, एक लंबी ड्राइव कैसी रहेगी? इस दौरान बात करें
शांति से, समझदारी से, रिश्तों
को निभाने की मंशा अगर दोनों रखते हैं, साथ रहने की इच्छा
अगर दोनों रखते हैं, तो यह कारगर होगा। कहीं मैंने पढ़ा था, यहाँ ज्ञान न बाँटिए, यहाँ सब ज्ञानी हैं! जी
हाँ, आप ज्ञानी हैं, इसमें
क्या शक? पर आप कुछ जानने के लिए गूगल या ए आई का सहारा भी तो लेते हैं न, तो ये समझ लीजिए ये सलाह वहीं से आई है।
कई
बार हम अपने आसपास के लोगों को समझ नहीं पाते हैं। हम जिनके साथ समय बिताते हैं, दिनभर
बातें करते हैं, वे लोग चाहे हमारे घर के हों, या फिर हमारे दफ़्तर के या हमारे मिलने जुलने वाले, या हमारे रिश्तेदार, इनमें से बहुत से लोग ऐसे
होते हैं जो या तो पूर्वाग्रही ही होते हैं या फिर नकारात्मक होते हैं, जिनके द्वारा कही गईं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातें हमें प्रभावित करती
हैं और उनका असर हमारे रिश्तों पर पड़ता है। इस बात के लिए हमें सजग रहना चाहिए कि
हमारे मित्र, मिलने जुलने वाले और रिश्तेदार, जिनके परिवार खुशहाल हैं, उनके साथ हम समय
बिताएँ अपने विवाहित जीवन को कैसे जीना है, इसे समझें, या इसके लिए हम अपने रोल मॉडल भी बना सकते हैं, हम अपने आसपास के लोगों में सकारात्मक लोग ढूँढें। जैसी संगति होती है, वैसा ही हमारा मानसिक स्तर और मानसिक क्षितिज बन जाता है, इसे भूलना नहीं है दोस्तों! है न....।
जब
विवाहित जोड़े लड़ते हैं, तो यह आसानी से “हर आदमी अपने लिए” वाली स्थिति में बदल सकता है। यह एक
ढलान वाला चक्र है, जो अक्सर विनाशकारी परिणाम की ओर ले
जाता है। रिश्ते को टूटने से बचाने के लिए, यदि आप
चीज़ों को बदलना चाहते हैं, तो आपको अपने समझौता कौशल
में सुधार करना होगा। इसकी शुरुआत थोड़े बहुत से की जा सकती है, जैसे वेज और नॉन वेज भोजन....यदि इसी को मुद्दा बनाना था, तो शादी से पहले क्यों नहीं सोचा? अगर आप अपने
विवाह को बचाना चाहते हैं, तो आपको अपने रिश्ते को अपनी
प्राथमिकता बनाना होगा। इसका मतलब है इसे अपने बच्चों, अपने
करियर या किसी और एँगेजमेंट से ऊपर रखना होगा। आजकल ऐसा भी देखा जा रहा है कि पति
पत्नी साथ साथ बैठे हैं, पर दोनों अपने अपने फोन में
लगे हुए हैं। जो सामने है, वह अदृश्य है, जो अदृश्य है, आभासी है, वर्चुअल है, वह दिल में है। आपको अपने रिश्ते
को अपने जीवन के अन्य सभी रिश्तों से ऊपर रखना होगा। एक दूसरे के साथ समय बिताने
और एक दूसरे की भावनाओं को साझा करने से प्रेम का धागा टूटता नहीं, और न ही उसमें गाँठ पड़ती है। अरे भई, वीकेंड पर तो अलग अलग प्रोग्राम न बनाओ,
एक साथ एक जगह पर साथ रहो, साथ साथ रहने से भी कभी कभी बातें बन जाती हैं, कुछ अनकही
गुत्थियाँ सुलझ जाती हैं, एक दूसरे को पैमपर करना, समय देना भी तो ज़रूरी है रिश्ते
में, वह गीत याद है आपको? जाने क्या तूने काही, जाने क्या मैंने सुनी, बात कुछ बन ही
गई| क्या कहते हैं दोस्तों!
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आज
संतोषजनक बात ये है कि ऐसी चिकित्सा विधियाँ हैं, जिनके द्वारा विवाह
या टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। वैवाहिकी चिकित्सा एक़
तरह की समूह चिकित्सा है, जो पारिवारिक चिकित्सा के
बहुत करीब है। इस चिकित्सा विधि में पति और पत्नी के बीच के पारस्परिक संबंधों को
उत्तम बनाने का प्रयास किया जाता है। निस्संदेह काउंसलिंग करवाना रिश्ते को बचाने
के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। भारत में छोटे शहरों में काउंसिलिंग के महत्व
को समझने में अभी वक्त लगेगा, पर बड़े शहरों में लोग
थेरेपी ले भी रहे हैं, और ठीक भी हो रहे हैं। हाँ, विदेशों में इसका खूब चलन है और लोग इस बात को छुपाते नहीं, कि वे थेरेपिस्ट से मिल रहे हैं। दोस्तों, हमें
भी इन कृत्रिम दीवारों को गिराना होगा, क्योंकि अब ये
अभेद्य दीवारें नहीं हैं, इन्हें कभी भी भेदा जा सकता
है, गिराया जा सकता है। है न दोस्तों!
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अरे
हाँ! बातों बातों में नीरज को तो भूल ही गई....आज वह खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी जी
रहा है, दीक्षा के साथ नहीं, आकांक्षा के
साथ.....दोस्तों! विवाह प्रेम के धागे से बुना एक इंद्रधनुषी कपड़ा है, इसे प्रेम से ही सहेजना होगा। ये धागा है विश्वास का है, भरोसे का है, जीवन भर का है, इसे मत तोड़ो चटकाय...
सच
कहूँ दोस्तों! धरती पर कहीं दूर भी अगर कोई रिश्ता टूटता है न, तो
बवंडर आ जाता है, कोई लैंडस्लाइड हो जाती है, सुनामी आ जाती है, तूफ़ान आ जाता है। और चलते
चलते बस यही कहूँगी दोस्तों! रिश्तों को सहेज कर रखें, ये
हमारी ज़मीन हैं, आकाश हैं, हमारी
पहचान हैं, दिल का सुकून हैं और सबसे बड़ी बात, ये हमारा वजूद हैं, हमारा अस्तित्व हैं।
आपने
अपने रिश्तों को कैसे सहेजा है, बताइए तो ज़रा! अपने अनुभव, अपने किस्से शेयर कीजिए..कीजिइएगा ज़रूर.. भूलना नहीं, मैसेज बॉक्स में लिखकर भेजिए, भेजिएगा ज़रूर, मुझे इंतज़ार रहेगा.....
और..आप
भी तो इंतजार करेंगे न ....अगले एपिसोड का...करेंगे न दोस्तों!
सुनते
रहिए, सुनाते रहिए, हो सकता है, क्या पता यूँ ही बातें करते करते कुछ रिश्ते सँवर जाएँ! संभव है न दोस्तों? मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए...मुझे सुनिए....औरों को सुनाइए....मिलती
हूँ आपसे अगले एपिसोड के साथ...
नमस्कार
दोस्तों!....वही प्रीत...वही किस्से कहानियाँ लिए.....आपकी मीत....
मैं, मीता गुप्ता...
END MUSIC
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