नानी आईं सपनों में


 नानी आईं सपनों में
नानी आईं सपनों में,
चाँदनी लिपटी आँगन में,
धीरे बोलीं — “मत रो बिटिया,
मैं हूँ तेरे हर क्षण में...”
नानी आईं... सपनों में...

रात थी गहरी, चाँद था सोया,
मन था मेरा बिल्कुल खोया,
अचानक कोई छुअन सी आई,
माँ जैसी वो ममता रोई।
वो बोलीं — “डरना मत बेटी,
साथ तेरे मैं हर मोड़ पे खड़ी ।”
नानी आईं सपनों में...
चाँदनी लिपटी आँगन में...

गोद में उनकी लोरी गूंजे,
आँखों में बचपन फिर पूजे,
कानों में वो कहती जातीं —
“सच्चे दिल से राह बनातीं।
जीवन में जब अँधियारा हो,
दीपक बनकर  तू जगमगाती।”
नानी आईं सपनों में...
प्रीत घुली हर कण में...

कहने लगीं — “तेरी मुस्कानें,
मेरे गीतों की पहचानें,
तेरे आँसू मोती जैसे,
उनसे सींचे मेरे गाने।”
फिर बोलीं — “प्यार बाँटती रह,
तू जग में  मेरी निशानी ।”
नानी आईं सपनों में...
सुगंध बसी हर मन में...

मैंने कहा — “नानी, मत जाओ,
कुछ पल और पास ठहर जाओ।”
वो मुस्काईं — “जीवन पथ है,
हर मिलन में बिछोह समाओ।”
“जब दीपक जलता तेरे घर,
समझना मैं भी मुस्कराओ।”
नानी आईं सपनों में...
धड़कन बन हर क्षण में...

हर दीये की लौ में झिलमिल,
नानी रहतीं मन में...
नानी रहतीं... मन में...

यह स्मृति और स्नेह की एक लोरी है —
टू कहती-छँटाक भर की छोरी है,
सपनों में आकर वो बोली 
बातों में मिश्री सी घोली  
अपनी जगह तेरी  माँ को देदी, 
उस ने संभाली प्रेम की वेदी |
अब तो सपना प्रीत गया,
उनका आशीर्वाद ही संगीत बन गया |


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