पुस्तक समीक्षा: ‘चौदह फेरे’ – शिवानी

 

पुस्तक समीक्षा: ‘चौदह फेरे’ – शिवानी

चौदह फेरे’ हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका शिवानी का एक गहन सामाजिक उपन्यास है। यह रचना पहली बार 1972 में प्रकाशित हुई और कुल 217 पृष्ठ हैं। शिवानी ने अपने ढेरों उपन्यासों की तरह इस उपन्यास में भी विवाह, परिवार और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के बीच के परस्पर संघर्ष को अभिव्यक्त किया है।
कहानी एक छोटे से समकालीन कसबे के दो परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ विवाह के प्रतीक चक्र “फेरे” के माध्यम से सामाजिक बुनावट उभरकर आती है। प्रमुख पात्र सीमा और रेखा, दोनों ही विवाह के चौदह फेरे निभाते हुए अपनी व्यक्तिगत पहचान तलाशने का साहस जुटाती हैं। पंडितजी द्वारा संचालित पारिवारिक समारोहों में पारंपरिक रस्म-रिवाजों के बीच छुपे द्वंद्व, दबाव और लघु-आनंद सजीव हो उठते हैं।
कहानी रेखा-रेखा घटनाचक्रों की बजाय गहरे मनोवैज्ञानिक विवरणों पर ज़ोर देती है। संवादों में क्षेत्रीय बोली और पारिवारिक आचार-व्यवहार की शाब्दिक सूक्ष्मता स्पष्ट रूप से झलकती है। शिवानी ने अध्यायों को श्रृंखलाबद्ध तरीके से रखा है, जिससे प्रत्येक फेरे के साथ पात्रों की आंतरिक परतों का परिदृश्य गहराता जाता है।
उपन्यास की मुख्य विषय-वस्तु है-परंपरागत विवाह संस्थान बनाम महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक अपेक्षाएँ और वैवाहिक दायित्वों का द्वंद्व, पीढ़ियों के बीच स्थापित नियमों में परिवर्तन की आवश्यकता और स्त्री विमर्श के समकालीन रूप: अधिकार, स्वीकृति, विद्रोह आदि|
उपन्यास में पात्रों का मानवीय सौंदर्य और मनोभूमि में सटीक उत्कीर्णन किया गया है, पारिवारिक रस्मों को यथार्थपूर्ण ढंग से चित्रित करने साथ -साथ भाषा में सहजता, पर संवादों में मार्मिकता है तथा विवाह के पारंपरिक पहलुओं को नई दृष्टि से देखने का नवाचार भी है|
धीमे कथानकगत विकास के कारण कुछ पाठक समय-समय पर गति की कमी महसूस कर सकते हैं और पारंपरिक रस्मों का निरंतर वर्णन आधुनिक पाठक को थोड़ा भारी लग सकता है, परंतु जो पाठक शिवानी को पढ़ते रहे हैं, उनके लिए यह आनंददायक अनुभव है|
चौदह फेरे’ शिवानी का एक ऐसा उपन्यास है जो विवाह के प्रथागत आयामों को चुनौती देते हुए स्त्री-पुरुष, परंपरा-आधुनिकता की जटिलताओं में खोया सहज वाणीगत दस्तावेज पेश करता है। इसीलिए स्त्री विमर्श की यात्रा में यह कृति हिंदी साहित्य में अपनी स्थायी पहचान पाती है।

अवश्य पढ़ें! 

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