EPISODE-18 पल पल दिल के पास...11/09/26

 EPISODE  18    

पल पल दिल के पास...11/09/26

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नमस्कार दोस्तों! मैं मीता गुप्ताएक आवाज़एक दोस्तकिस्से कहानियाँ सुनाने वाली आपकी मीत। जी हाँआप सुन रहे हैं मेरे पॉडकास्ट, ‘यूँ ही कोई मिल गया’ के दूसरे सीज़न का अगला एपिसोड ... जिसमें हैंनए जज़्बातनए किस्सेऔर वही पुरानी यादें...उसी मखमली आवाज़ के साथ...। जी हाँ दोस्तोंआज हम बात करेंगे प्रेम कीप्यार कीमुहब्बत की..जी हाँ प्रेमजो पल पल दिल के पास रहता हैयदि प्रेम न होफूल किसके लिए खिलेंगेतितली किसके लिए उड़ेगीआसमान में इंद्रधनुष किसके लिए अपनी छटा बिखेरेगाआसमान से शबनम किसके लिए बरसेगीफिर तोन किसी पत्ती पे कोई ओस से प्रेम पत्र लिखा जाएगा.....न रात को चाँद को कोई चकोर ताकेगा और न ही हिरण कस्तूरी की तलाश में बन बन भटकेगा। फिर किसी चट्टान पे हरी हरी घास नहीं उगेगीन कोई लहर किनारों को आ आ कर उसे नम करेगी। है न दोस्तों!

MUSIC  

काफ़ी पुरानी बात हैमॉरीशस की धरती पर एक विशालकाय पक्षी की प्रजाति रहा करती थी। ये पक्षी बहुत भले थे, भोले भाले थे और इंसानों के करीब आने की और करीब रहने की चाहत रखते थे। लेकिन इंसान ने उन्हें कभी समझा ही नहीं। और धीरे धीरे उसने उन्हें दुर्लभ होने के कगार तक पहुँचा दिया। इंसान की निर्ममता तो देखिएकि उसने उस भोले पक्षी का नाम "डोडो" रख दिया.. डोडो यानी भोंदू रख दिया। डोडो पक्षी तो इस दुनिया से हमेशा के लिए चले गएतब भी तथाकथित अकलमंद इंसानों को कोई फ़र्क नहीं पड़ा| फ़र्क पड़ा, तो एक ख़ास प्रजाति के पेड़ों पर.. डोडो के जाने के बाद उन्होंने उगना कम कर दिया। ईश्वर ने डोडो को उड़ने के लिए नहींइंसानों के करीब रहने के लिए ही बनाया था और वो इंसानों का प्रेम पाने के लिए ही धरती पर आया था। लेकिन हमारी तथाकथित अक्लमंदीबेरुखी और अनदेखी से डोडो की संपूर्ण प्रजाति ही नष्ट हो गई और उसके विरह मेंउसके वियोग मेंएक ख़ास जाति के पेड़ों ने भी अपनी ज़िंदगी को नष्ट कर लिया। बात पहली नजर में साधारण सी लगती है दोस्तोंलेकिन इसमें गहरा दर्शन छिपा हुआ है... और कुछ चुभते सवाल भी। इस पूरे ब्रह्मांड की हर छोटी बड़ी चीज़ एक दूसरे से कनेक्टड हैगहराई से जुडी हुई है। बाहर से अलग अलग दिखने वाली चीज़ें भीतर से कहीं बहुत महीन तारों से जुडी होती हैं। छोटी सीसामान्य सीसाधारण सी चीज़ भी उस असाधारण से जुडी है....उस परम सत्ता का अंश है। हम सभी ये बात जानते तो हैंपर यकीन करने से गुरेज़ करते हैं।

एक छोटी सी तितली के पंख फड़फड़ाने से कहीं बहुत दूर..किसी देश में बारिश हो सकती है क्या?....कौन सी बूँद किस रेत के कण से जुड़ी है.....कौन सी कली कब किसके लिए चटकेगी….कौन जाने?

कौन किसका हिस्सा हैकौन किस कारण से जुड़ता हैकौन किस कारण से बिखरता हैटूटता हैकिस कारण से मिटता है?... कौन जानेकोई नहीं जानता! हर छोटी से छोटी घटना अपने साथ वजह लेकर, कारण लेकर जन्मती है। हमारा कोई बस नहीं है इस पर। फिर हम इसे क्यों अनदेखा करते रहते हैक्यों सहज नहीं रहते। और जो सहजसरल और निर्मल होते हैंउन्हें हम डोडो या भौंदू समझ लेते हैं। डोडो, जी नाम तो सुना ही होगा दोस्तों?

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क्या प्रेमिल हो जानाप्रेमी बन जानादोस्ती का हाथ बढ़ा देना या किसी के करीब रहने कीसंग कीसाथ की चाहत करना डोडो हो जाना हैक्या यह भोंदूपन की निशानी हैक्या प्रेम करना हमारी विशेषता हैहमारा टेलेंट हैहमारा हुनर हैक्यों कर बैठते हैं हम प्रेम किसी एक सेक्या खोजते हैं हम उसमेंउसे या खुद कोक्या वो दुनिया में सबसे ज़्यादा खूबसूरत हैइसलिएप्रसिद्ध हैइसलिएकिसी विशेष गुण के कारणकिसी ख़ास हुनर की वजह सेया हमने ही उसे पूज पूज कर देवता बना दिया हैक्या किसी घाट के गोल पत्थर को शालिग्राम कह कर पूज लिया है हमने?

प्रेम करना हमारा स्वभाव है। आत्मा की अतल गहराइयों में कहीं बहुत गहरे में सोता होगा प्रेमना जाने कब से, कितनी सदियों सेलेकिन कोई उसे अपनी नन्हीं सी कोमल सी छुअन से जगा जाता है। फिर क्या...फिर तो झरना फूट पड़ता है प्रेम का। कोई आपकी उंगली पकड़ कर आपको आत्मा के भीतरबहुत गहरे में लिए जाता हैप्रेम नगरी की सैर कराता है... आप दूसरे के माध्यम से खुद को खोजने चल पड़ते हैंगोया वो टार्च जलाता हो और हम अपना बिखरा सामान समेटने लगते हों, सामान जैसे, यादेंसपनेअहसास आदि। यक़ीनन वो ख़ास होता हैया हम उसे "सबसे खास" बना देते हैं।

सिर्फ़ देह से जुड़कर आप कई बार चूक कर जाते हैं दोस्तोंजब कोई आपकी आत्मा को छूता हैतो आपको खुद की गहराई पता चलती है। किसी दूसरे के द्वारा ही आप अपने को जानते हो... अंतस में सचेत होते हो। गहन संबंध में हीकिसी के प्रेम में हीआप खुद को खोज पाते हो। उस छुअन को आप सदियों तक याद रखते हो। हर प्रेम अनोखा होता है दोस्तोंउसकी प्यास अनोखी होती हैउसके अंदाज अनोखेउसकी खोज अनोखी होती है। हम सब अपनी ही खोज में चलते जाते हैं दूर...कहीं बहुत दूर...

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सच कहूँ दोस्तों! हम खुद के लिए ही प्रेम करते हैं....खुद को खोजने के लिए। किसी को प्रेम करना हमारे हिस्से का प्रेम है। हमारा हिस्सा है और हमारा ही किस्सा भी। हमारी प्यास है और हमारा अंदाज़ भी। इसमें ईर्ष्याउम्मीद और कुछ पाने की बात तो है ही नहीं। तो अब सवाल ये कि इस तरह से बेशर्त प्रेम करना क्या डोडो यानी भोंदू हो जाना हैजी नहींकतई नहींहम अपने प्रेम की गोंद से रिश्तों को चिपकाते हैं अपने लिए। अपनी मर्ज़ी सेहम लोगों को पसंद करते हैंप्यार करते हैं।

अब आखिरी सवालजब सभी अपने प्रेम की खोज में हैंया खुद की खोज में हैंसभी को तलाश हैदरकार है प्रेम कीतो हर चेहरा उदास क्यों हैक्यों प्यासे हैं लोगजबकि सागर तो कहीं आस पास ही है। फिर भी महसूस क्यों नहीं कर पाते प्रेम कोउसके आनंद कोउसकी उर्जा कोउसकी अजस्र शक्ति कोउसके उजास को?

दरअसल हमने अपने ज्ञान काबुद्धि का कुछ ज़्यादा ही विकास कर लिया है। बहुत अक्लमंद हो गए हैं हमइसलिए छोटी बातों में अपना कीमती समय बर्बाद करना नहीं चाहते। किसी ने क्या खूब कहा है   

अक्ल के मदरसे से उठइश्क के मैकदे में आ

लेकिन हमारा अहम्हमारा अभिमान और उसका कद बहुत बड़ा हैवहाँ से प्रेमदोस्ती जैसी चीज़ें बहुत छोटी दिखती हैं। हमने अपनी अक्ल पे परदे भी लगा रखे हैं ताकि वो सुरक्षित रहेकोई छोटी सी चीज़ आकर उसे नष्ट न कर दे। हम जानते हैं कि जिस दिन भी किसी दरार से या "की होल" से प्रेम झाँक गयाउसी दिन हमारी सारी अक्लसारी अकड़ धरी की धरी रह जाएगीसारे ठाट बाट फीके पड़ जाएँगेअहंकार के ये प्रासाद ढह जाएँगेइसलिए हमने अक्ल पर मोटे मोटे परदे डाल दिए। अब हम अपनी आँखनाककान सब परदों में छिपा कर रखते हैं। हवा का कोई झोंका प्रेम संदेश न ले आएकोई प्रेम पुकार हमें विचलित न कर देकोई फूल महक न जाएकोई साँस हमारे दिल को धड़का न जाए। कितने सतर्ककितने सावधान रहने लगे हैं हम... है न दोस्तों!

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अब इतनी चौकसीइतने पहरेइतने परदोंइतने घूँघट के बाद किसी डोडोकिसी भौंदू की मजाल कि वो तनिक भी ठहर पाए। वो तो आँखों में आँसू लिएहोठों पे बेबसी की मुस्कान लिए चुपचाप एक दिन चला ही जाएगा न। कभी कभी सोचती हूँ दोस्तोंजिस तरह से प्रेम के प्रतीक पक्षीपेड़ और कई जीवजिनमें अब मधुमक्खियों की बारी हैनष्ट हो रहे हैंरूठ के जा रहे हैं बिना कुछ कहेइनके पलायन करने का कारण आज तक कोई खोज नहीं पाया हैऔर न इन घटनाओंइन नातों और संबंधों को कोई समझ ही पाया है। लेकिन एक दिन जब खोज पूरी होगीतब तक इंसान कितना नुकसान कर चुके होंगे इस धरती काप्रेम कातब इस नुकसान की भरपाई कौन करेगाकहीं ऐसा न हो जाएकि एक दिन बिना कुछ कहेख़ामोशी से हमारी अकलमंदीहमारी अनदेखीहमारे अनमनेपनबेरुखी से आहत होकर…प्रेम ही न कहीं चला जाए डोडो पक्षी की तरह दुखी होकर।

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पर मुझे लगता है कि शायदइंसान को उस दिन भी कोई फर्क नहीं पड़ेगाप्रेम की करुण पुकारउसका अलविदा कह जानाक्या हम कभी सुन पाएँगेहमारी अकल के परदों पे तो अब कोई दस्तक सुनाई ही नहीं देती।

लेकिन प्रेम, प्रेम तो पल पल दिल के पास रहता है| प्रेम के धारी से जाने के बाद फूल किसके लिए खिलेंगे? तितली किसके लिए उड़ेगी? आसमान में इंद्रधनुष किसके लिए दिखेगा? आसमान से शबनम किसके लिए बरसेगी? न किसी पट्टी पे कोई प्रेम पत्र लिखेगा, न रात को चाँद को कोई चकोर ताकेगा और न ही कोई हिरण कस्तूरी की तलाश में बन बन भटकेगा| फिर किसी चट्टान पे हरी हरी घास नहीं उगेगी, और न ही कोई लहर किनारों को आ आ कर छू छूकर भिगोएगी|

याद रखिएगा दोस्तोंप्रेम बहुत स्वाभिमानी होता है और तुनक मिज़ाज भी। वो खुद कभी अकल के परदे पीछे नहीं छिपतान कभी घूँघट के पट खोलता है। वो दरवाज़े पे दस्तक बन के दम तोड़ सकता हैलेकिन कभी कोई दरवाज़ा नहीं तोड़तावो परदों के घूँघट के बाहर सदियों तक इंतजार कर सकता हैलेकिन परदे नहीं खींचता। जब हमने लगाएँ हैं ये अहम् और अभिमान के परदेतो हटाने भी हमें ही होगे नभला परदों के पीछे से कभी चाँद दिखता है क्याप्रेम छूटता है क्या...जो पल पल दिल के पास रहता होवह केवल उत्सर्ग जानता हैऔर कुछ नहीं...है न दोस्तों!

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और चलते चलते बस यही कहूँगी दोस्तों! याद रखिएगास्वाभिमानी प्रेमतुनक मिज़ाज प्रेमजैसा भी प्रेम होवह प्रेम हैइसलिए उसे पाने के लिए हमें अकल के परदे हटाने होंगेघूँघट के पट खोलने होंगेदिल के दरवाज़े पे दस्तक देनी होगीउसे परदों के घूँघट के बाहर लाना होगाअहम् और अभिमान के परदों हो हटाना होगाऔर हटा कर उस चाँद को देखना होगा। अंत में यह याद रखिएगा दोस्तों! कि आपके लिए भी एक छोटी सी तितली कहीं पंख फड़फड़ा रही हैजिससे किसी देश में बारिश हो रही है....एक बूँद किसी रेत के कण से जुड़ रही है.....एक कली कहीं चटक रही हैकेवल आपके लिए..केवल आपके लिए! प्रेम से जुड़ी बातें हैं येयूँ ही चलती ही रहेंगीइसीलिए कहती हूँ कि अब आप बताइए अपने प्रेम की  कहानीअपने किस्से शेयर कीजिए .. कीजिइएगा ज़रूर..। मैसेज बॉक्स में लिखकर भेजिएमुझे इंतज़ार रहेगा.....

और..आप भी तो इंतजार कर रहे हैं न ....अगले एपिसोड का...कर रहे हैं न दोस्तों!

सुनते रहिएसुनाते रहिएहो सकता हैयूँ ही बातें करते करते आपको आपका प्यार मिल जाए..है न दोस्तोंमेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए...मुझे सुनिए....औरों को सुनाइए....मिलती हूँ आपसे अगले एपिसोड के साथ...

नमस्कार दोस्तों!....वही प्रीत...वही किस्से कहानियाँ  लिए.....आपकी मीत.... मैंमीता गुप्ता...

END MUSIC

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