EPISODE-7 यूँ ही कोई दिल लुभाता नहीं 10/04/2026

EPISODE  7

यूँ ही कोई दिल लुभाता नहीं 10/04/2026

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नमस्कार दोस्तों! मैं मीता गुप्ताएक आवाज़एक दोस्तकिस्से  कहानियाँ सुनाने वाली आपकी मीत। जी हाँआप सुन रहे हैं मेरे पॉडकास्ट, ‘यूँ ही कोई मिल गया’ के दूसरे सीज़न का अगला एपिसोड ... जिसमें हैंनए जज़्बातनए किस्सेऔर वही पुरानी यादें...उसी मखमली आवाज़ के साथ...। जी हाँ दोस्तोंआज मैं बात करूंगी किसी ऐसे चेहरे कीकिसी ऐसी शख्सियत कीजिसकी सुंदरता को हमारा मन खोज ही लेता हैऔर हम कह पाते हैं कि यूँ ही नहीं दिल लुभाता कोई..

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 दोस्तोंबात किस्से  कहानियों की हो रही हैतो चलिएआज एक सुप्रसिद्ध कहानी की बात करते हैं.. क्या आपने महान कहानीकार चंद्रधर शर्मा गुलेरी जी की कहानी ‘उसने कहा था’ पढ़ी हैचलिएमैं बताती हूँइस मार्मिक कहानी के बारे में, जिसकी मूल संवेदना यह है कि संसार में कुछ ऐसे निःस्वार्थी लोग होते हैंजो किसी के कहे को पूरा करने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे देते हैं क्योंकि वह उन्हें अपनी जान से बढ़करप्राण से बढ़कर लगता है और क्योंकि.. क्योंकिउसने कहा था..। कहानी लहना सिंह की हैजो अपने प्राण देकर बोधा सिंह और हजारा सिंह के प्राणों की रक्षा करता हैकेवल इसलिए कि लहना सिंह सूबेदारनी के ब्रह्म मंत्र, ‘उसने कहा था’ को याद रखता है।रघुकुल रीत सदा चली आईप्राण जाई पर वचन न जाई’,कुछ ऐसा ही उद्घोष है इस कहानी का। लहना सिंह हमारे हृदय पटल पर हमेशा के लिए अंकित हो जाता है। वह प्रेमत्यागबलिदानविनोद  वृत्तिबुद्धिमत्ता और सतर्कता आदि विविध गुणों का स्वामी है। ‘अपने लिए तो सभी जीते हैंलेकिन जो दूसरों के लिए मरते हैंऐसे व्यक्ति विरले ही होते हैंलेकिन होते अवश्य हैं।

ऐसा कोई कैसे सोच सकता है भलाऐसा कोई तभी सोच सकता हैजब उसे महसूस हो कि दूसरे व्यक्ति से उसका जन्म  जन्मांतर का प्रगाढ़ रिश्ता हैकुछ जाना  साकुछ अनजाना  सा..जी हाँ दोस्तों! वैसे भी यूँ ही तो कोई दिल लुभाता नहीं|

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अक्सर लोगों को कहते सुना है कि फलां  फलां व्यक्ति से उनका कोई पुराना रिश्ता हैपुराना नाता हैपिछले जन्म काया जन्म  जन्मांतर का , वरना कोई यूँ ही कैसे दिल को लुभाने लगता है। चंद हसीन मुलाकातों में रिश्ता इतना गहरा हो गया कि लगने लगा जैसे सदियों से एक  दूसरे को जानते हों। 

पिछले दिनों मेरे एक मित्र ने बताया कि उनकी ज़िंदगी में एक नया  नया रिश्ता बना हैलेकिन ऐसा लगता है कि जैसे सदियों से वे एक  दूजे को जानते हों। पहली मुलाक़ात में रूह का नाता हो गया आपस में... क्या यह संभव हैलोग तर्क देते हैं कि इतनी बड़ी दुनिया में कोई एक चेहरा ही हमें क्यों लुभाता हैज़रुर उससे हमारा कोई पुराना नाता है। वरना कोई एक ही खास क्यों लगताक्या है उस चेहरे में कुछ ऐसा हैजो किसी और में नहीं दिखता। कोई किसी की मुस्कान को अतुलनीय मुस्कान कहता हैकोई किसी के अंदाज़ पर फ़िदा हैकोई किसी की आँखों की गहराई में खो गया हैतो कोई किसी के गोरे रंग या सुंदर देह का दीवाना हो गया हैकिसी को किसी की हँसी में सिक्कों की खनखनाहट सुनाई देती हैकोई किसी की आवाज़ में गुनगुनाहट सुनता हैतो कोई किसी की खुशबू में मदहोश हुआ जाता है... इस ख़ास किस्म की पसंद के पीछे आखिर है क्यायानी किसी को कोई क्यों लुभाता हैऔर क्या यह आकर्षण रूह का संबंध या कोई रहस्यया कोई जादू या कोई अदृश्य प्रेरणा हैकौन जाने?

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जी हाँ दोस्तोंयह भी सच है कि हम कुछ ख़ास आवाज़ोंखास चेहरों और खास रंगों के प्रति आकर्षित होते हैं। लेकिन फिर वही बात कि सौ सुंदर व्यक्तियों के बीच कोई एक ही प्रेमपात्र क्यों बन जाता हैक्यों दुनिया की भीड़ में कोई एक चेहरा ही हमें लुभाता है?  क्या कारणक्या वजह हो सकती हैयानी सौ व्यक्तियों को अपने सामने खड़ा करके किसी एक का चुनाव किया जाएतो सवाल उठता है कि वही क्यों?

इस के पीछे आखिर क्या रहस्य हैचलिए चर्चा करते हैं..

इस के पीछे चुनने वाले के सौंदर्यबोध के अपने मानदंड और अंतर्संबंधों के बारे में उसकी मान्यताएँ जाने  अनजाने महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सुंदरता के अपने  अपने मानदंड बन जाते हैं और वह व्यक्ति उन्हीं से मिलते जुलते रूप को पसंद करता है। किसी को हरमनप्रीत कौर लुभाती हैतो किसी को सरोजिनी नायडू। कोई मधुबाला की सुंदरता देख मुग्ध होता हैतो किसी को सावित्री बाई फुले प्रभावित करती हैं। यही वजह है कि किसी को किसी की मुस्कान लुभाती हैकिसी को किसी का चेहरा, किसी को किसी की बुद्धिमत्ता आकर्षित करती हैतो किसी को किसी का सेन्स ऑफ़ हयूमरकई पुरुष या महिलाएँ गोरे रंग के प्रति आकर्षित होते हैंतो कुछ साँवले रंग के प्रतिया सुंदर देह के प्रतितो कोई किसी में बुद्धिविवेक और चतुराई खोजता है। लेकिन यहाँ यह भी समझना होगा कि क्या कोई एक विशेषता हमें उसकी ओर आकर्षित करती हैजी नहीं दोस्तों! आकर्षण हमें समग्र रूप सेसमग्र व्यक्तित्व से होता है। प्रेम टुकड़ों में नहीं किया जा सकता। प्रेम की पूर्णता तभी हैजब वह समग्र रूप से किया जाए।

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यानी दोस्तोंउसका चुनाव कुछ बातों पर निर्भर होता हैना कि एकदम साँयोगिक और किसी दैवीय या रहस्यमयी प्रेरणा पर। अक्सर लोग इस आकर्षण को रूह का नातापिछले जन्म का संबंध या कोई रहस्य मान बैठते हैं। शुरूआती आकर्षण और चुनाव में शारीरिक गुणों की महती भूमिका होती हैपर असली परीक्षा तो आपसी अंतःक्रियाओं यानी व्यक्तित्व के आँतरिक व्यावहारिक गुणों के परीक्षण में होती है। यह सच भी है दोस्तोंजब हमारे संबंध बनते हैंविशेष तौर पर स्त्री और पुरुष के बीच के संबंधों मेंआरंभ में शायद कहीं दैहिक आकर्षण होता होक्योंकि बाहरी आवरण से ही आप अंतस तक पहुँच पाते हैंपरंतु रिश्ता वही कायम रहता हैजो शारीरिक और दैहिक सुंदरता से होता हुआ मन की सुंदरता को खोज लेता है। ठीक वैसे ही जैसे प्यासा हिरण मरुभूमि में भी जलाशय ढूंढ ही लेता हैप्यासी धरती की पुकार पर मेघ बरस ही पड़ते है और सारे बंधंनों को तोड़ते हुए एक झरना सागर में मिल ही जाता है। जब रिश्ते कुछ दूर तक चल पड़ते हैंतो उन रिश्तो में आपसी समझव्यवहार का संतुलन और बिना कहे एक दूसरे को समझ लेने की प्रवृत्ति पैदा होने लगती है। और यहीं हम कह पाते हैं कि यूँ ही नहीं दिल लुभाता कोई।

सार यह है कि कोई चेहरा आपको लुभा रहा हैपसंद आ रहा हैआप किसी व्यक्ति विशेष के आकर्षण में बंधे जा रहे हैंतो आप इसे कोई नशा या जादू समझने की भूल ना करें। किसी का मिलनाआपके ज़िंदगी में उसका आना और छा जानाआपको आकर्षित कर देनाये महज़ संयोग मात्र हो सकता है। आप को कोई यूँ ही नहीं लुभा रहा। उस लुभाने के पीछे कोई सदियों का नाता नहीं,ना कोई रहस्मयी प्रेरणाना पूर्व जन्म का कोई संबंध ही है। बल्कि, उसके पीछे आपके सौंदर्य  बोध के मानदंडआपकी अंतर्संबंधों के बारे में मान्यता और कुछ जैव रसायन। वह सौ चांदनियों की चमकशीतलता और सुकून लेकर आपकी ज़िंदगी में आया हैऔर मैंने उसे सहेजा हैपसंद किया हैमुहब्बत की हैतो वे मेरी ही आँखें हैंजिन्हें वह सुंदर दिखता हैहमें शेक्सपीयर की कही गई बात भी भूलनी नहीं चाहिए कि सुंदरता देखने वाले की आँखों में ही बसी होती है। इसलिए अब अगर कोई आपको लुभाएतो सौ बार सोचें कि यूँ ही नहीं लुभाता कोईआप ही ने तो उसे चुना है! है न दोस्तों! 

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बातें उसकी हो रही हैंजिसने यूँ ही आपको नहीं लुभाया हैकुछ तो बात है उसमेंतो ऐसी बातेंऔर उसकी बातें तो अनंत होंगी.. कैसे विराम दूँआपके पास भी तो उसके किस्से होंगेकहानियां होंगी,जो आपके दिल को भाता होआपको लुभाता होहै न दोस्तों! मुझे मैसेज बॉक्स में अपनी भावनाएँ लिखकर प्रेषित कीजिएभेजिएगा ज़रूरमुझे इंतज़ार रहेगा.....और आप भी तो इंतजार करेंगे न ....अगले एपिसोड का...करेंगे न दोस्तों!

सुनते रहिएहो सकता हैमेरी इस कहानी में आपके भी किस्से छिपे हों.....! मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए...मुझे सुनिए....औरों को सुनाइए....मिलती हूँ आपसे अगले एपिसोड के साथ...

 नमस्कार दोस्तों!....वही प्रीत...वही किस्से  कहानियाँ  लिए.....आपकी मीत.... मैंमीता गुप्ता...

END MUSIC

 

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