EPISODE-3 प्यार को प्यार ही रहने दो 13/02/26

EPISODE  3

प्यार को प्यार ही रहने दो 13/02/2026 

INTRO MUSIC

नमस्कार दोस्तों! मैं मीता गुप्ताएक आवाज़एक दोस्तएक किस्से कहानियाँ सुनाने वाली आपकी मीत  लीजिए हाज़िर हैंनए जज़्बातनए किस्सेऔर कुछ पुरानी यादेंउसी मखमली आवाज़ के साथ...आज हम बात करने जा रहे हैं, ‘प्रेम दिवस’ यानी ‘वैलेंस्टाइंस डे’ की। बस मनाने ही तो जा रहे हैं हमप्रेम का यह दिवसप्रेम का एक ही दिवस? खैर ‘वैलेंस्टाइंस डे’ के मौके पर बाज़ार गिफ़्ट्सबहुत से सुर्ख गुलाबों और ग्रीटिंग कार्ड्स से अटे रहते हैंबाज़ारीकरणउदारवाद और ग्लोबलाइज़ेशन का सही रूप स्वरूप इन मौकों पर ही तो उजागर होता है। मैंने सोचाचलोबाज़ार की रौनक देखी जाएकुछ अपने वैलंटाइन के लिए भी गिफ़्ट ले लिया जाए। बदलते दौर में उम्र या अवस्था थोड़े ही मायने रखती हैसो आर्चीज़ गैलरी पहुँचीवास्तव में गिफ्ट्स की सुंदरताउन पर लिखे संदेशों ने मन मोह लिया। रंग  बिरंगेबड़े ही क्रिएटिव गिफ्ट्स वहाँ दिखाई दिए। अभी गिफ्ट्स की सुंदरता को निहार ही रही थी कि एक लड़की की आवाज़ सुनाई दीभैयाये सारे कार्ड्स और गिफ़्ट्स पैक कर दीजिए अलग  अलग! उस लड़की के साथ एक और लड़की थीजो उसके कानों में कुछ फुसफुसाई......दोनों ठहाका मार कर हँसने लगीं....!!!

मैं सोचने लगी.....कितने वैलंटाइन होंगेवैलनटाइंस डे’ क्या सचमुच ‘प्रेम दिवस’ को कहते हैं? क्या प्यार प्यार रह गया हैया व्यापार बन कर रह गया हैक्या फिर मौज मस्ती को प्यार का नाम दिया जा रहा हैप्यार तो एब्सट्रैक्ट होता हैसूक्ष्म होता है दोस्तों! प्रेम कोई भावना नहीं होतीप्रेम तो आपका अस्तित्व होता है। व्यक्त्तित्व बदलता हैशरीरमन और व्यवहार बदलते रहते हैंकिंतु हर व्यक्त्तित्व से परे जो अपरिवर्तनशील हैजो कभी नहीं बदलतावही प्रेम हैवही तो प्यार है! शायर की मानेंतो वह दिल को दुखाने के लिए ही सहीफिर से उसे छोड़ के जाने के लिए ही सहीअपने प्रेमी को पुकारता हैक्योंकि उसका मानना है कि प्रेममुहब्बत की होश वालों को ख़बर ही नहीं होतीवे तो जानते ही नहीं कि बे  ख़ुदी किसे कहते हैंइसे तो केवल वही समझ सकता हैजिसने कभी इश्क़ किया होप्रेम का अनुभव किया हो।

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दोस्तों! प्यारमुहब्बत या प्रेम एक एहसास हैजो दिमाग से नहीं दिल में रहता है। यह एक मज़बूत आकर्षण और निजी जुड़ाव हैजो सब कुछ भूलकर उसके साथ जाने को प्रेरित करता हैजिससे आप प्रेम करते हैं। सच्चा प्यार वह होता हैजो सभी हालातों में आप के साथ होयानी आपके दुख को अपना दुख और आप की खुशियों को अपनी खुशियाँ माने। कहते हैं कि अगर प्यार होता हैतो हमारी ज़िंदगी बदल जाती है। पर ज़िंदगी बदलती है या नहींयह इंसान पर निर्भर करता है। पर प्यार इंसान को ज़रूर बदल देता है। प्यार का मतलब सिर्फ़ यह नहीं है कि हम हमेशा उसके साथ रहेप्यार तो एक  दूसरे से दूर रहने पर भी खत्म नहीं होतादूर कितने भी होअहसास हमेशा पास होता है।

प्यार को अक्सर वासना के साथ जोड़कर देखा जाता है। भला ऐसा प्यार भी कैसा प्यार हैजिसमें केवल भौतिक देह का ही महत्व होभगवान कृष्ण और राधा के बीच भी तो प्रेम का रिश्ता थापर यह शारीरिक नहीं थाबल्कि भक्ति का एक विशुद्ध रूप थानिःस्वार्थ प्रेम थाआत्मिक प्रेम था। प्रेम व्यक्ति के जीवन की पराकाष्ठा होती हैजो समर्पण भाव की अंतरिम घटना हैजबकि वासना व्यक्ति के खोखले जीवन में पूर्ति  पिपासा की तृप्ति की घटना हैजो आजकल के तथाकथित प्यार में निहित है। वासना के सतह पर उलझा मनुष्य प्रेम की नहींदेह की माँग करता है। वासना से भरा पुरुष हमेशा स्त्री को पूज्या नहीं भोग्या ही समझता है। है न दोस्तों!

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चलिए दोस्तों! अब बात करते हैं उस उदात्त प्रेम की..जिसके लिए अनेक फ़कीरों नेभक्तों ने तड़प  तड़प के प्राण त्याग दिए....वे अपने रब को, अपने खुदा को मैदानों मेंरेगिस्तानों मेंपर्वतों परदरिया में ढूँढते  ढूँढते अपना जीवन ही गवाँ बैठे....पर वे दीवाने मर कर भी अमर हो गए...उनका नाम फ़िज़ाओं में घुल गया हमेशा के लिए...खुशबू बन कर बस गया फूलों में सदा के लिए…रंग बन कर समा गया है इंद्रधनुष के रंगों में......क्षितिज के उस पार से झाँक कर मुस्कराता है वह....साँसारिक प्रेम सागर के जैसा हैपरंतु सागर की भी सीमा होती है। दिव्य प्रेम आकाश के जैसा हैजिसकी कोई सीमा नहीं होती। उस चांद को जानेंउसे समझेंजिसकी चाह में चातक पक्षी जान दिए रहता है......टकटकी बांधे....निःस्वार्थ भाव से...मगन होकर बस निहारता है|

 

MUSIC

 

दोस्तों! पिछले दिनों "विवाह" फिल्म देखी। वाह! क्या फिल्म हैयह एक पारिवारिक प्रेम कहानी है और एक पारंपरिक भारतीय विवाह के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैजिसमें कई महत्वपूर्ण संदेश छिपे हुए हैं। कहानी एक छोटे शहर की लड़की पूनम और प्रेम की हैजो एक बड़े उद्योगपति का बेटा है। दोनों के परिवारों की सहमति से उनका रिश्ता तय होता है। विवाह की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। विवाह से ठीक पहलेएक दुर्घटना में पूनम का चेहरा और हाथ बुरी तरह जल जाते हैं। परिवार और समाज के दबाव के बावजूदप्रेम पूनम का साथ नहीं छोड़ता और अपने प्रेम और वचन को निभाने का फैसला करता है। प्रेम का यह निर्णय सच्चे प्रेम और समर्पण का प्रतीक बन जाता हैवह पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों को उच्चतम महत्व देता हैवह पूनम की आंतरिक सुंदरता से प्रेम करता हैन कि उसके बाहरी रूप से। आपने देखी है यह फिल्म

 

MUSIC

 

जी दोस्तोंहमने बात शुरू की थी "प्रेम  दिवस" से.... ‘वैलेंस्टाइंस डे’ सेपर सवाल वही है, प्रेम के लिए एक़ ही दिन क्योंजैसे ही ऐसा सोचावैसे ही बादल का एक टुकड़ा चुपके से धरती को भिगो गया और मैं.... मैं मिट्टी में मिल कर महकने लगी। जिस पल कली फूल बन रही थीकोई उसमें  रंग और खुशबू भर रहा थाउस पल मैं ही तो साँस ले रही थीजब गुलाब धीरे धीरे सुर्ख हो रहे थे और दिल धड़कना सीख रहा थाउस पल से मैं साथ हूँ सबकेक्योंकि मैं ही तो प्रेम हूँ। इतनी बड़ी दुनिया में हज़ारों चेहरों के बीच कोई एक चेहरा जब हमें भाने लगेजिसके ख्याल से हमारा दिल धड़कने लगेजिसकी हर बात हमें हमसे जुदा करने लगेजिसके लिए हमारे मन में अहसासों का कलश भरने लगे और ये अहसास आँखों के रास्ते छलकने लगें, आँसू गालों पे आ  आकर ढलकने लगेंकोई तस्वीर दिल में खिंचने लगेजिसे हम जितना भुलाएँ और वो उतना ही करीब महसूस होने लगेहवाओं में उसके होने की खुशबू आने लगेआँखों में नमी रहने लगेमन की दहलीज़ पे आहट होने लगेहोंठ चुप हो जाएँमगर आखें बोलने लगेकोई सर्दी में धूप  सा और गर्मी में शाम  सा लगने लगेबिन बरसात हम भीगने लगें   उस पल समझ लेना कि हमें किसी से मोहब्बत हो गई है।

 

है न दोस्तों!.....

 

MUSIC

 

कोई एक दिन नहीं होता प्यार का... ना एक साल... ना एक जनम...और तो और मौत पर भी यह कहानी ख़त्म नहीं होती। यह सदियों से है और सदियों तक रहेगा। हाँ... लेकिन जब हम इसे छू कर देखना चाहते हैंअपनी मुठ्ठी में इसे कैद कर लेना चाहते हैंतब यह चुपचाप उड़ जाता हैहै न अजीब  सी शयआज तक इसका रहस्य कोई नहीं जान पाया। लेकिन यह जानता है कि कौन  सा हिस्सा किस का हैकौन  सा टुकड़ा कहाँ जोड़ा जाएगाकिस बंद दरवाज़े पे दस्तक देनी है और किस मकान से चुपचाप निकल जाना है। ये सारी कायनात प्यार के दम से चलती हैकिस को किसके लिए ज़मीं पे बुलाया गया हैइसके लिए देशसीमाकाल, सरहदेंउम्रकुछ भी मायने नहीं रखती। यह सागर को रेगिस्तान में बदल कर रेत के कणों में मुस्काता हैरेगिस्तानों में मरूद्यान खिलाता है...और....बदले में कुछ नहीं माँगतायह रुकता नहीं कहीं...ठहरता भी नहीं कभी।

 

प्यार पत्तियों में हरापन बन कर, हमारी देह में लहू बन कर बहता हैइसे डालियों से तोड़े गए गुलाबों मेंग्रीटिंग कार्डों या मंहगे तोहफ़ों में मत खोजनासिर्फ़ महसूस करना आँखें बंद करके। जिस पल कोई तुमसे से होकर गुज़रने लगेतुम उसे सोचो और वो झट से पास आ बैठेचाहे ख्यालों में ही सहीउसका ना होना भी होना लगेभरी दुनिया में कोई तुम्हें तनहा करने लगेउस पल समझ लेनातुम्हें मोहब्बत हो गई हैप्यार हो गया है। फिर प्यार तो प्यार हैइसे हम कोई नाम देंऐसा ज़रूरी तो नहीं….. यह तो प्यार हैबस प्यार है...बस प्यार है....!! यही तो शाश्वत हैयही तो चिरस्थाई हैहै न दोस्तों!

 

MUSIC

 

ये प्यार की बातें हैं दोस्तों! यूँ ही ख़त्म करने का मन नहीं करतापर.....हाँआपके प्यार के किस्से सुनाने हैं मुझे! अपने प्रेम की कहानी  मैसेज बॉक्स में लिखाकर भेजिएगा ज़रूरमुझे इंतज़ार रहेगा.....और आप भी तो इंतजार करेंगे न ....अगले एपिसोड का...करेंगे न दोस्तों!

 

सुनिएगा ज़रूर… हो सकता हैमेरे प्यार की कहानी में आपके भी किस्से छिपे हों.....! मेरे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए...मुझे सुनिए....औरों को सुनाइए....मिलती हूँ आपसे अगले एपिसोड के साथ...

 

नमस्कार दोस्तों!....वही प्रीत...वही किस्से  कहानियाँ  लिए.....आपकी मीत.... मैंमीता गुप्ता...

 

END MUSIC

 

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